डॉक्‍टर्स का दावा- 80 फीसदी कोरोना मरीज उचित दवा और आराम से ठीक हो रहे

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डॉक्‍टर्स ने कोरोना पर किया दावा. (File pic)

डॉक्‍टर्स ने कोरोना पर किया दावा. (File pic)

Coronavirus: डॉक्‍टर्स का कहना है कि लोगों को यह सोचकर घबराहट नहीं होनी चाहिए कि उन्हें कोरोना संक्रमित होने पर आईसीयू बिस्तर की आवश्यकता होगी. सिर्फ 20 फीसदी मरीजों को ही ऐसी जरूरत होती है.

अहमदाबाद. देश में बढ़ रहे कोरोना मामलों (Coronavirus) के बीच ऑक्‍सीजन (Oxygen) और अन्‍य जरूरी संसाधनों की कमी की बात सामने आ रही है. इस दौरान कई मरीज बेहतर इलाज के लिए अस्‍पतालों का रुख कर रहे हैं. ऐसे में गुजरात के विख्‍यात डॉक्‍टर्स का कहना है क‍ि 80 फीसदी कोरोना मरीज (Corona patients) उचित दवा और आराम से ही ठीक हो रहे हैं.
इसके साथ ही इन डॉक्‍टर्स का कहना है कि रेमडेसिविर का इस्‍तेमाल इस समय सावधानीपूर्वक करना चाहिए. इस इंजेक्‍शन के लिए कोरोना की दूसरी लहर में जद्दोजदह करनी पड़ रही है. ये डॉक्‍सर्ट गुजरात सरकार की कोविड टास्‍क फोर्स का हिस्‍सा हैं. डॉक्‍टर्स का कहना है कि लोगों को यह सोचकर घबराहट नहीं होनी चाहिए कि उन्हें कोरोना संक्रमित होने पर आईसीयू बिस्तर की आवश्यकता होगी. सिर्फ 20 फीसदी मरीजों को ही ऐसी जरूरत होती है. डॉक्टरों ने रेमडेसिविर का विवेकपूर्ण उपयोग करने का सुझाव दिया.
उनका दावा है कि यह जीवन रक्षक दवा नहीं है. रेमडेसिविर एक एंटी-वायरल दवा है जिसका व्यापक रूप से कोरोना के इलाज में इस्‍तेमाल किया जाता है और इसकी मांग कोविड की दूसरी लहर में बढ़ गई है. संक्रामक रोगों के विशेषज्ञ डॉ. अतुल पटेल का कहना है, ‘हल्के लक्षण वाले लोगों को घबराना नहीं चाहिए. यह एक गलत धारणा है कि प्रत्येक मरीज को आईसीयू की आवश्यकता होती है. 80 फीसदी मरीज केवल उचित दवा और आराम के माध्यम से ठीक हो जाते हैं. केवल 20 फीसदी मरीजों को देखभाल के लिए अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है.’

वहीं डॉ. पटेल ने कहा कोई सबूत नहीं है जो साबित करता है कि रेमडेसिविर एक जीवनरक्षक दवा है. यह मृत्यु दर को भी कम नहीं करता है. यह केवल अस्पताल में रहने के समय को कम करता है और कम ऑक्सीजन लेवल वाले लोगों को दिया जाना चाहिए, जो आईसीयू में भर्ती हैं.




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